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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

मौत

सविनय शुक्ल

फिर कल की तरह आज न हो दाँतों से टकराते दाँत न हो मन में भरी रुवासी न हो होंठों तक आये आँसू न हो रोंगटे खड़े न हो शब्दों में रूकावट न हो काँपते मेरे हाथ न हो पेट में भूख न हो बरसात न हो तो शायद कल फिर मेरी मौत न हो


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