मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

खुद की तलाश

सौरभ “ जयंत”

खुद ही खुद की तलाश में खुद को मैंने खो दिया, भटक रहा हूँ महफ़िल महफ़िल खुद की ही तलाश में, पहचान मिली जो दुनिया से खुद को पाते खो दिया खुद से खुद की मुलाकात में जाने क्या कुछ हो गया , खुद से खुद की पहचान में खुद को मैंने खो दिया जाने कौन घडी थी वो जब खुद को मैंने खो दिया, खुद ही खुद की तलाश में खुद को मैंने खो दिया खुद से खुद की पहचान में जाने क्या कुछ हो गया , खुद से खुद की मुलाकात में खुद को मैंने खो दिया .


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें