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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

राजनीति

सत्येंद्र कुमार मिश्र 'शरत्'

राजनीति विरासत बन कर रहगयी है एक परिवार की। चले आइये सीना तान कर मुस्कुराते हुए, अंधी जनता सदियों से करबद्ध खड़ी है प्रतिक्षारत। पिछलग्गू बनना स्वभाव में है जो न बदला है और न शायद बदलेगा। हाय! क्या करूं बुद्धि... धर्म.... सम्प्रदाय पर सवार है राजनीति और देश की आंखें बंद।


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