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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

राज़

सत्येंद्र कुमार मिश्र 'शरत्'

जीवन एक खुली किताब है लोगों को कहते सुना है, और यही पढ़ता भी आया हूं। लेकिन कौन है वह जिसके सामने यह किताब परत दर परत खुलती चली जाती है। जीवन की इस किताब में अनेक ऐसे राज छिपे हैं जो शायद ही कभी खुलते हों। और कभी कभी तो जिंदगी भी एक राज बन कर रह जाती है। कोई नहीं मिलता इसे खोलने वाला।


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