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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

मुद्दे और भावनाएं

सत्येंद्र कुमार मिश्र 'शरत्'

दफ़ना दूं किसी पत्थर के नीचे गहरे भावनाओं को न निकल सकें बाहर । अंधेर बहुत है..... शामिल हो जाऊं भीड़ में, भावनाओं के खेल में। बंद कमरे चुस्कियों के बीच बहस मुद्दे... किसान... राम... मंदिर... धर्म संसद... आरक्षण..... युवा....। एका एक गहरी दबी भावनाओं के बीच प्रकट हुई हनुमान जी की पूंछ... जाति कुंडली के लिए भटक रही।


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