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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

तुम्हारी याद

रवि प्रभात

आज फिर वही उदासी छाई है तुम्हारी परछांई भी कहीं नज़र नहीं आई है कहीं कहीं से कुछ खुश्बू आती है जो तुम्हारी याद दिलाती है उदास बैठा हूँ तुम्हारी याद में अपने दोस्त की तलाश में कुछ पहर का ही तो साथ होता है उस में भी न मिलो तो दिल उदास होता है मेरा अस्तित्व तुम्हारे लिए कुछ नहीं पर तुम्हारे सिवा मेरा अस्तित्व नहीं (2) आज फिर से बहार छाई है आज फिर से यहाँ चमन लौटा है आज किसी के खुश्बू से पुरा गगन महका है आज उन के दीदार से ये दिल बार बार धड़का है


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