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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

जिन्दगी एक रंगमंच

नरेन्द्र श्रीवास्तव

कहा गया है जिन्दगी एक रंगमंच है और हम निभा रहे हैं 'किरदार ' जो हमें दिया गया है परम परमेश्वर ने हमें पहचानना है अपना किरदार और निभाना है इसे बेहद संजीदगी से ईमानदारी से जरा सा आलस्य जरा सी भूल जरा सा भटकाव जरा सी भी बेईमानी... चालाकी हमसे छीन ले जाये यह बेहतरीन मौका इसीलिये निभायें अपना किरदार पूरी ईमानदारी से समर्पित भावना से दूसरे किरदार का सम्मान करते हुये ताकि जो कहानी है पूरी हो सके.


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