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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

नामुमकिन को मुमकिन करना......

मनोज कुमार शुक्ल "मनोज "

नामुमकिन को मुमकिन करना, वर्तमान की चाहत है। हिन्दुस्तान बदल दो यारो, तब संवरेगा भारत है।। परिवर्तन ही राह बनाता, सबको देता राहत है। उन्नति की राहें खुल जातीं, यही देश की चाहत है।। रूढ़िवादिता बने रुकावट, बदलो अपनी आदत है। समय अगर हाथों से निकला, तब तो सबकी शामत है।। परिस्थितियों के संग बढंे जो, सबकी तभी हिफाजत है। समय बदलते हम भी बदलें, कभी न आती आफत है।। सदी पुरानी बीत चुकी अब, पूरा युग परिवर्तित है। हर क्षण सोचो और विचारो, नवयुग को यह अर्पित है।। देश भक्ति दिल में ना हो तो, उस कपूत पर लानत है। जो माँ को टुकड़ों में बांटे, उसकी करो खिलाफ़त है।। त्याग,तपस्या कुर्बानी से, रहता देश सलामत है। रखें सुरक्षित इसे हम सभी, सबसे बड़ी नियामत है।। जात-पांत मजहब से ऊपर, जीना सही रिवायत है। मानवता की रक्षा करना, सबसे बड़ी इबादत है।।


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