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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

निकलो सब मतदान है करना.....

मनोज कुमार शुक्ल "मनोज "

निकलो सब मतदान है करना, अपना मत बरबाद न करना। सौंपे जिनको देश की सत्ता, पछताने का काम न करना।। मतदाता पहले था भोला, काँधे में रखता था झोला। भावनाओं में बह जाता था, नेक नियत का खाता खोला।। जनता का हित जो भी करता, वही दिलों में राज है करता। बुद्धिमान है जनता सारी, सबका लेखा-जोखा रखता।। जागरूक मतदाता अब है, सोच समझकर देता मत है। देश सुरक्षित किन हाथों में, ऐसा ही सबका अभिमत है।। भ्रष्टाचार अभी भी भाई, मिलजुल कर सब करें सफाई। दीमक सा वह निगल रहा है, देश की होगी तभी भलाई।। राजनीति की बिछी बिसात, चतुर खिलाड़ी देते मात। देशभक्त ही दौड़ लगाते, राष्ट्रद्रोही झेलें आघात।। बैठे घर मिलती खैरात, अकर्मण्यता की सौगात। गीता का संदेश हैं भूले, दास मलूका की बारात।। सच्चे दिल से बोट है करना, धर्म-जात में कभी न फँसना। मानव हित का ध्यान है रखना, लालच में बिल्कुल ना पड़ना।। टैक्स हमारा वोट हमारा, देश बनाना जग से न्यारा। भूले कभी न इसको भाई, भारत ही है हमको प्यारा।।


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