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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

वादे

गरिमा

वादा किया था मैंने खुद से, कोई वादा न तोडेगे हम, जीवन की उलझनों में ऐसे उलझे, सारे वादे भूल गए हम। वादा किया था खुद से, कभी निराश न होंगे हम। दुखों का पहाड़ ऐसा टूटा, खुश होना भूल गए हम। वादा किया था खुद से, किसी का दिल न दुखाएं हम। पर ऐसे उलझे दुनियादारी में, दिल ना दुखाएं भूल गए हम। वादा किया था खुद से, सबके दर्द मिटायेगे हम। दर्द इतना मिला जिन्दगी से, सबका दर्द मिटाना भूल गए हम।।


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