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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

वोट के मौसम

धर्मेन्द्र अरोड़ा
"मुसाफ़िर पानीपती"

वोट के मौसम सुहाने आ गए! देश को चूना लगाने आ गए!! हाथ जोड़े कह रहे नेता सभी! आपको ऊंचा उठाने आ गए!! सब तरफ बौछार वादों की हुई! आज नेता दिल लुभाने आ गए!! पांच सालों तक रहे खामोश जो ! उन लबों पर भी फ़साने आ गए!! दूर तक जिन से नहीं है वास्ता! वो मुसाफ़िर को रिझाने आ गए!!


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