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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

श्रीरामनवमी पर दस हाइकु

शशांक मिश्र भारती

1. देवि ही देवि कल्याण है करती मन हो सच्चा। 2. ज्ञानी गुणी हैं मूढ़ भी बनजाते मां की कृपा। 3. करो याद तो निर्भय कर देती हरे गरीबी। 4. सिद्धि दायिनी शक्ति समन्वय मां कल्याणी। 5. तुम प्रसन्न दुख दर्द न रहें धनी विपन्न। 6. देवि अम्बिके त्रय लोकेश्वरि मां हम भजते। 7. रोग नाशक आश्रय है सबको युवा बालक। 8. ऊँ सती साध्वी आर्या जया पुनीता शूल धारिणी। 9. मन : विचित्रा आद्या दुर्गा भवानी तारिणी चित्रा। 10. सदा शोभिनी पिनाक धारिणी मां वाक् दायिनी।


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