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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

वोट देवा चालो

कवि राजेश पुरोहित

वोट देवा चालो भायला वोट देवा चालो। काकी ये ले जाओ थें तो भाभी ले जाओ।। दादा और दादी के संग भायला वोट देवा चालो।। गली मोहल्ला में माइक सूं अलख जगाओ रे। उनतीस तारीख आई भायला वोट देवा चालो।। लोकतंत्र को लाग्यो मेळो पाँच बरस में भायला। कुम्भ समझ लगा ले डुबकी वोट देवा चालो।। आँख्या सूं तो सूझे कोनी जना मनख ने रे। ब्रेल लिपि को पर्चो थाम वोट देवा चालो।। लूला लंगड़ा सगळा ही वोट देगा भायला। बैठ ट्राई सायकल पर वोट देवा चालो।। विशेष योग्यजन को थें पूरो राखो ध्यान। हाथ थाम दिव्यांग साथी का वोट देवा चालो।। चूल्हा चौका बर्तन सारा छोड़ चालो बहिना । लोकतंत्र के त्योहार पर वोट देवा चालो।। पाँच साल में आयो रे फिर लोकतंत्र को पर्व। वोट की कीमत समझो भायला वोट देवा चालो।। कस्या लोभ लालच में कभी न आजो। बना लोभ के भायला वोट देवा चालो।। भावों के रंगों की रंगोली आपां मांडवा चालां। वोट बारात निकाल भायला वोट देवा चालो।। बैंड बजावाँ अलख जगावां ,आपां नारा लगावां रे। दीपदान का कर आयोजन वोट देवा चालां।। स्वच्छ छवि का नेता चुन संसद में भिजवाओ। पाँच साल में फेर आपणी आहुति देवा चालो।।


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