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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

यादों के जो अनमोल क्षण

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

यादों के जो अनमोल क्षण मन में बसा हरदम रखें, राहत मिले जिस याद से उर से लगा हरदम रखें। जब प्रीत की हम डोर में इक साथ जीवन में बँधे, उन सुनहरे ख्वाबों को हम दिल में जगा हरदम रखें। छाती हमारी शान से चौड़ी हुई थी जब कभी, उस वक्त की रंगीन यादों को बचा हरदम रखें। जब कुछ अलग हमने किया सबने बिठाया आँख पे, उन वाहवाही के पलों को हम सजा हरदम रखें। जो आग दुश्मन ने लगाई देश में आतंक की, उस आग के शोलों को हम दिल में दबा हरदम रखें। जो भूख से बिलखें सदा है पास जिनके कुछ नहीं, उनके लिये कुछ कर सकें ऐसी दया हरदम रखें। जब भी 'नमन' दिल हो उठे बेजार गम में डूब के, बीते पलों की याद का दिल में मजा हरदम रखें।


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