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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

ओ मेरे प्यारे कम्प्यूटर

सुशील शर्मा

ओ मेरे प्यारे कम्प्यूटर। कितने सुंदर कितने स्वीटर। मोटे मोटे डेस्कटॉप हो। पतले छोटे लेपटॉप हो। हार्डवेयर तुम्हारा तन है। सॉफ्टवेयर तुम्हारा मन है। रेम तुम्हारा है मस्तिष्क। मेमोरी है रोम की डिस्क। इंटरनेट तुम्हारा खून। फाइल में लिखते मजमून। फोल्डर में फिर फाइल रखते। ओपन इनको हम कर सकते। की बोर्ड से अक्षर लिखते। फाइल डिलीट हम कर सकते। पेण्ट में जाकर चित्र बनाते। रंगों से फिर उसे सजाते। वर्ड में पापा कविता लिखते। कभी भी उसको एडिट करते। ईमेल से पत्र हम लिखते। विज्ञापन से सब कुछ बिकते। गूगल बाबा हमें बताता। सुंदर सुंदर पाठ पढ़ाता। नई जानकारी ले आता। गूगल में बनवाओ खाता। कम्प्यूटर में है सब संसार। इससे चलता है व्यापार। ऑनलाइन हर चीज है मिलती। हर दुकान अब इससे चलती। ओ मेरे कम्प्यूटर राजा। अब तू हर दिल में साजा। तेरे गुण मैं कैसे गाऊँ। तेरे बिन अब चैन न पाऊँ।


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