मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

मैगी का जमाना*****

प्रिया देवांगन "प्रियू"

जब ले आहे मैगी संगी , कुछु नइ सुहावत हे। भात बासी ला छोड़ के , मैगी ला सब खावत हे।। दू मिनट की मैगी कहिके , उही ला बनावत हे। माई पिल्ला सबो झन , मिल बाँट के खावत हे।। सब लइका ला प्यारा हावय , एकरे गुन ल गावत हे । स्कूल हो चाहे पिकनिक हो , मैगी धर के जावत हे।। लइका हो चाहे सियान, सबला मैगी सुहावत हे । कोनो कोती जावत हे , पहिली मैगी बनावत हे।। कोनो आलू प्याज डार के, त कोनो सुक्खा बनावत हे। कोनो सूप बनावत त , कोनो सादा खावत हे।। फरा मुठिया के नइ हे जमाना , मैगी के जमाना हे। दू मिनट की मैगी बनाके , माइ पिल्ला ल खाना हे।।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें