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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 60, मई(प्रथम), 2019

बच्चो! अच्छे बनने के लिये अच्छी बातें जानें,सीखें

नरेन्द्र श्रीवास्तव

बच्चो!अभी सीखने और समझने की उम्र भी है,समय भी और अवसर भी।जितना सीखते और समझते चलोगे उतनी आसानी भी होगी और उतने आगे बढ़ने के अवसर भी मिलेंगे।आगे बढ़ने का मतलब है, प्रगति, खूबसूरती, सम्मान और सुख-शांति से भरपूर।

अभी तुम जितना पढ़-लिख लोगे।जितना सीख लोगे।वह तुम्हारे बहुत काम आयेगा।

सीखना दो प्रकार का होता है।एक शब्द ज्ञान और दूसरा व्यवहारिक ज्ञान।शब्द ज्ञान से तुम बुद्धिमान बनोगे और व्यवहारिक ज्ञान से संस्कारवान। संस्कारवान को चरित्रवान भी कह सकते हैं और चरित्रवान को ' अच्छा इंसान'।अच्छा होना याने तुम्हें जानने-पहचानने वालों से तुम्हें प्यार और सम्मान मिलना।

अब अच्छा तुम्हें इतना प्यार और सम्मान दे रहा है तो 'अच्छे' को अच्छी तरह समझना भी है। ये अच्छा याने अच्छाइयों का भंडार।ये अच्छाई क्या हैं तो इसे समझने की कोशिश करो।जिसे करने में तुम्हें भय ना लगे,जिसे करने में सभी खुश हों।जैसे बड़ों की बात मानना।किसी बात के लिये जिद नहीं करना।नखरे नहीं करना।झूठ नहीं बोलना।छुप के कोई चीज नहीं खाना।किसी का कोई सामान उसकी बिना अनुमति के नहीं लेना। किसी से लड़ना-झगड़ना नहीं। ऐसी बहुत सी बाते और चीजें हैं जिनको तुम अपनेआप समझ लोगे कि क्या अच्छा है,उसे अपनाते चलो। कभी तुम अनुभव करना जब तुम कोई काम करना चाहते हो तो तुम्हारा मन ही बतला देता ,ये करो,ये न करो। जब मन 'ना ' कहे तो 'ना'। 'हाँ' कहे तो 'हाँ'। इसे यूँ भी समझ सकते हो,जिसे करने में तुम्हें भय या शर्म लगे वह' ना' और जिसे करने में तुम्हें भय या शर्म न लगे उसे 'हाँ '।

ये अच्छी बातें तुम्हें मम्मी-पापा,दादा-दादी,नाना-नानी,मौसी,बुआ,गुरू जी भी समय-समय पर बताते, समझाते और सिखलाते हैं। उन बातों और समझाईश पर ध्यान रखते हुये अपनाना चाहिये। ऐसी किताबें भी मिलती हैं। अनमोल वचन की भी किताब मिलती हैं।इन्हें फुरसत के समय पढ़ना चाहिये।

अभी इस उम्र में जो भी सीखोगे,याद करोगे वह सदैव याद रहेगा।

एक बात और,जब 'अच्छा' है तो 'बुरा'भी है।हमें इस 'बुरे' से बचना है।इस बुरे के बारे में भी मम्मी-पापा,गुरूजी ... ने तुम्हें बतलाया होगा,उस हरगिज नहीं करना।

आजकल देखा जा रहा है बच्चे गुटखा खाने लगे हैं। गुटखा खाने से मुँह और पेट दोनों खराब होते हैं।बीमार रहने लगते हैं।यह सबसे बुरी आदत है,इससे बचना है। कोई तुमसे कितना भी जोर जबरदस्ती करे।लालच दे।शर्त लगाये।तुम्हें उनकी बातों में नहीं आना है। आज इतना ही।... और बातें फिर कभी।


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