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वर्ष: 2, अंक 36, मई(प्रथम), 2018



हार


मोती प्रसाद साहू


 


सिंह तुम मुझे खाकर
यह मत सोचना
तुम थे बलशाली
मैं कायर-कमजोर

तुम्हारे पास था तुम्हारा पशुत्व
बल का अहंकार
अपना साम्राज्य
विचार एवं ममता शून्य आक्रमण

इसके विपरीत
मैं , पर्यावरण मीत
अहिंसा का पुजारी
जीवों पर दयाभाव
स्वयं के साथ तुम्हारा भी बचाव

बस; यही मेरी कमजोरी
बन गयी मेरी हार!
बन गयी मेरी हार!


 

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