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वर्ष: 2, अंक 36, मई(प्रथम), 2018



मैं नारी हूँ


गरिमा


 

मैं आधुनिक नारी हूँ
स्वाभिमान से जीती हूँ
खुद्दारी है जीवन में
डर का कोई नाम नहीं है
परुषो से आगे आयी हूँ
हर काम में लोहा मनवाया है
खेलो में ही या हिमालय पर
हर जगह अपना परचम लहराया है
हर घर की शान हूँ मैं
हर घर की पहचान हूँ मैं
मेरे बगैर यज्ञ न होते
न कोई पूजा होती पूरी
नारी एक शक्ति है
इसको क्यों नहीं मान लेते
छाए हो व्यापार करना
या हो राजनीती की बात
हर जगह है मेरी पहचान
नर नारी कदम मिलाकर चलते
ऐसी मेरी वाणी है
नारी एक चिंगारी है

 
 

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