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वर्ष: 2, अंक 33, मार्च(द्वितीय), 2018



मेरी होली गुलाबी है


डॉ शुभा श्रीवास्तव


चढ़ी है आज फागुन, मेरी होली गुलाबी है
फागुन में बिखरे है है रंग
तुम खेले गोपियों संग
वो रंग नही आयेगा, मेरी अदा नवाबी है
चढ़ी है आज फागुन, मेरी होली गुलाबी है
भंग का रंग तुमको, नही होश भुलायेगा
क्या पियोगे तुम कुछ और, मेरे नैन रकाबी है
चढ़ी है आज फागुन, मेरी होली गुलाबी है
छुप जाओ चाहे जितना, इठला लो चाहे जितना
आज रंगुंगी मैं तुमको, मेरी छुअन गुलाबी है
चढ़ी है आज फागुन, मेरी होली गुलाबी है

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