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वर्ष: 2, अंक 33, मार्च(द्वितीय), 2018



भगवान की खोज


शिबु टुडू


मुझे क्यों
ऐसा लगता है,
कि- 
तु न था
न है
न रहोगे
सृष्टि के किसी कण में।
मुझे क्यों
ऐसा लगता है
कि-
तु सिर्फ 
बिन-दंत मुख से,
फिसले हुए शब्द हो,
वास्तविकता तेरा
न कभी था
न है
न कभी रहेगा
ब्राह्मण्ड के किसी कण में।
मुझे क्यों
ऐसा लगता है
कि-
मनुष्यों की अंधविश्वास
स्कूल,काॅलेजों के 
डिग्रियों के साथ बढ़ता जाता है,
मुझे नहीं लगता
कि मनुष्य की धर्मांधता
कभी खत्म था
न खत्म है
न कभी खत्म होंगे
संसार के किसी कोने में।


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