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वर्ष: 2, अंक 33, मार्च(द्वितीय), 2018



बेरोजगारी


डॉ दिग्विजय कुमार शर्मा "द्रोण"



आज के दौर में बढ़ती बेरोजगारी
न नौकरी रही, न रही कामगारी
न ही रही, कोई स्वरोजगारी
क्यों कि बेरोजगारी के दौर में
धन लगाने को कहाँ से आएगा
क्यों देश में यह स्थिति बन रही है
नौजवान ऐसे में पलायन कर रहा है
क्यों अशिक्षा को दोष देते है हम
क्यों भूल जाते हैं ऐसा करने से लोग
अपनी अपनी बाटी सब यहाँ रहे है सेक
रहते है सभी स्वार्थ हित की तलाश में
इसलिए अकर्मण्यता, अराजकता है फ़ैल रही
इस दौर में शिक्षित बेरोजगार है भटक रहा
चिंतन करें क्यों है बेरोजगारी बढ़ रही
क्या कारण है, क्या है इसका समाधान
क्यों सभी अपने कर्मो से करते है भेद
कैसे अंत होगा इस गरीबी और लाचारी का
कार्य ही एक मात्र साधन है बेरोजगारी का
नही करोगे तो न मिटेगी बेरोजगारी
न ही देश बदलेगा, न बदलेगी दुनियादारी
न हम बदलेंगे , न खत्म होगी बेरोजगारी
देश की उन्नति के लिए स्वयम को बदलना होगा
तभी यह देश तरक्की कर, प्रगति के सोपान चढ़ेगा।


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