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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



तांका


कमला घटाऔरा


  
 
  (1)
बोल को तोल
फिर तू मुँह खोल
हँसी उड़ेगी
खुल जायेगी पोल
निभाये न जो बोल ।
  (2)
भेद सुख का
पाना बड़ा कठिन
क्षणिक धूप
रहती सदा शीत
लेके दुख का रूप ।
  (3)
बीच राह में
पड़ जाना अकेले
पग डोलते
औझल होती राहें
धराशायी विश्वास ।
  (4)
बावला मन
कैसे करे निश्चित
शुभ अशुभ
चंचलता से भरा
करे सदा भ्रमित ।
  (5)
जीवन राहें
संकरी औ’ कँटीली
दृढ़ निश्चयी
चलते जायें चले
चूमे पग मंजिल ।

  

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