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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



रुबाइयाँ


रवि रश्मि ' अनुभूति '


         

( 1 )
शम्मा लो जल रही , अजी प्यारी - सी दिल पे छा रही , बेअख़्तियारी - सी बातें अब तो करते , वफ़ा की सब ही , अब तो है अलग , ख़ास तैयारी - सी ।
( 2 )
छल - कपट से रहो , हमेशा हटकर जियो ज़िंदगी सदा , अलग - सी हटकर बन जाओ एक ठोस , उदाहरण अब , जीना सीखें सभी तुम्हीं से , हटकर ।
( 3 )
कमतर अब तो नहीं , कहाएँगे हम सब रस्में जानकर , निभाएँगे हम दुनियादारी , बड़ी रस्म है समझें, पग तो पीछे नहीं , हटाएँगे हम ।
( 4 )
कुछ ख़ासमख़ास है , अभी आ जाना गीतों को तरन्नुम में तुम , गा जाना , झूमेंगी आज सब दिशाएँ , सुन लो , सजती हैं महफ़िलें , तुम्हीं छा जाना ।

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