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वर्ष: 2, अंक 32,  मार्च(प्रथम), 2018



विशेषज्ञ की राय :
बोर्ड परीक्षा:
अच्छी तैयारी तो वैतरणी पार


घनश्याम बादल


“अपने मन से यह बात पूरी तरह से निकाल दें कि परीक्षा कोई खौफनाक चीज है । भई , परीक्षा तो आपने जो साल भर पढ़ा है बस उसे परखने का एक जरिया मात्र है । जब आपने अच्छी तैयारी की है तो डर कैसा ? और नहीं कर पाए तो जितनी हो सके उतनी कर लें । “

इस बार बारहवीं के की ही तरह से दसवीं में भी सी बी एस ई ने बोर्ड परीक्षा षुरू कर दी है सी सी ई के बाद एकदम से पूरे पाठ्यक्रम की परीक्षा देने में छात्रों के पसीने छूट रहे हैं जिसकी एक झलक प्री बोर्ड परीक्षा के परिणाम से मिल रही है जिसमें करीब 70 प्रतिशत छात्र फेल हो गए है । एक के बाद दूसरी प्री बोर्ड की तैयारी में लगे परीक्षार्थी सेाच रहे होगें कि परीक्षा की वैतरणी कैसे पार की जाए ।

बढ़ता ‘एग्जाम फीवर :

जैसे- जैसे परीक्षा का समय पास आ रहा है बच्चों में ‘एग्जाम फीवर बढ़ता जा रहा है । देष भर में मनोवैज्ञानिकों , स्कूलों , शोधसंस्थानों व सामाजिक संस्थाओं के कितने ही उपाय करने के बावजूद भी परीक्षा का डर खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है । खुद प्रधानमंत्री तक ‘एग्जाम वॉरियर ’के माध्यम से विद्यार्थियों की हिम्मत बढ़ाने में लगे हैं पर हर परीक्षार्थी की पंहुच वहां तक नहीं है और परीक्षाभय का आलम यह है कि उत्तरप्रदेश में अब तक करीब दस लाख परीक्षार्थी परीक्षा छोड़ चुके हैं । जो दे भी दे रहे हैं वें भी एक अज्ञातभय से ग्रस्त हैं । स्वाभाविक है दूसरे प्रदेशों की बोर्ड परीक्षा में भी ऐसा ही देखने को मिल सकता है । किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए ज़रूरी है पहले यह जाना जाए कि उस समस्या का कारण क्या है ।

क्या हैं भय के कारण:

आखिर ऐसा क्या है कि भारत भर में परीक्षा का भय किशोरों में मानसिक तनाव व भय का कारण बना हुआ है । वैसे देखें तो यह कोई आज की बात नहीं है वरन काफी लंबे समय से परीक्षा का भय नन्हे मुन्नांे तक की नींद व चैन छीनता रहा है । एक वक्त तो ऐसा भी आया जब टीन एजर्स में बड़ी संख्या में परीक्षा परिणाम के भय के चलते आत्महत्या तक करने का रोग देखा गया था । आज हालात उतने भयावह तो नहीं हैं पर सामान्य भी नहीं कहे जा सकते हैं । आइए देखते हैं वे मुख्य कारण जो उसके लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।

तनाव क्यों :

परीक्षा की वजह से तनावग्रस्त व बीमार हो जाने , फ्रस्ट्रेशन के षिकार हो जाने के लक्षण सबसे ज्यादा एडोलोसेंट्स विशेषकर 13 से 17 साल तक के बच्चों में ज्यादा देखे गए हैं । माता पिता का डर पियर्स प्रेशर यानि साथियों का दबाव , दूसरे सहपाठियों से तुलना व प्रतिद्वन्दिता , स्कूलों की अस्वस्थ षिक्षा प्रणाली , टीन एज मानसिकता , उच्च कक्षाओं में मनमाफिक स्कूल या विषयों में प्रवेश का तनाव जैसे कई कारणों के चलते एक इस तरह का माहौल बन गया है कि परीक्षा का नाम सुनते ही पसीने आने लगते हैं ।

क्या करें ?

परीक्षा के दबाव के चलते फरवरी मार्च के महीने में टीन एजर्स का मानसिक संतुलन तक बिगड़ जाता है । मगर यदि थोड़ी सी सावधानी बरतें व उनके साथ मित्रवत् व्यवहार करें तों उन्हे भारी तनाव से बचाया जा सकता है ।

आईये विचार करते हैं कुछ ऐसी छोटी छोटी बातों पर जिनसे परीक्षा पास कर कर सकते हैं और अनावश्यक तनाव से भी बच सकते हैं । इन बातों पर गौर करें और उन्हे अपनाएं।

सफलता सूत्र :

अपने मन से यह बात पूरी तरह से निकाल दें कि परीक्षा कोई खौफनाक चीज है । भई , परीक्षा तो आपने जो साल भर पढ़ा है बस उसे परखने का एक जरिया मात्र है । जब आपने अच्छी तैयारी की है तो डर कैसा ? और नहीं कर पाए तो जितनी हो सके उतनी कर लें । परीक्षा से करीब एक घंटे पहले पढ़ना बंद कर दें , परीक्षाकक्ष या उसके बाहर परीक्षा की बात न ही करें तो बेहतर इस समय में बेतकल्लुफ हो जाएं । मानकर चलें आपको सब कुछ आता है । आत्मविश्वास परीक्षा पास करने व अच्छे अंक लाने का सबसे बड़ा सफलता सूत्र है ।

कौन सी पुस्तकें पढ़ें :

परीक्षा तैयारी हेतु अपना अध्ययन मानक पुस्तकों से करें , खास तौर पर एन सी आर टी या सी बी एस सी की पुस्तकों में दी गई जानकारी को ही उपयोग में लाएं । बाजारु नोट्स, कुन्जी, गाईड या दूसरी षार्टकट उत्तरों वाली पुस्तकों से बचें , हां , अच्छे प्रकाषनों और विस्तृत व प्रामाणिक पुस्तको को भी अपना सकते हैं।

कैसे बनाएं नोट्स :

यदि अच्छे अंक व ग्रेड़ लाने हैं तो गहन व विस्तृत अध्ययन ही एक मात्र रास्ता है , समय कम है तो अपने नोट्स बनाकर पढ़ना ज्यादा फलदायी हो सकता है । नोट्स बनाने के लिए चाहें तो अपने कोड़वर्ड़ बनाकर संक्षिप्त बिंदु भी तैयार कर सकते हैं । जैसे अंग्रेजी में फिगर्स ऑफ स्पीच के लिए शैंपू ( SHAMPOO) जैसे एक्रोनिम तैयार कर सकते हैं । हां , घबराहट पर काबू रखें इससे किसी भी समस्या का हल नहीं निकलता उल्टे याद किया हुआ भी भूल सकते हैं ।

कैसे बचें तनाव से :

मन को तनाव , बेचैनी , व्यग्रता और दुश्चिंता से बचायें , एकाग्रता लायें। जब कुछ समझ में न आ रहा तो थोड़ा प्राणायाम करें , आंख बंद कर सोचें , लंबे लंबे सांस लें व पानी पिएं खुद को थोड़ा आराम दें मदद मिलेगी और इससे स्मरणशक्ति भी बढ़ेगी ।

कैसा हो खान- पान :

खानपान पर पर्याप्त ध्यान दें । खाना पीना न छोंड़े । ज्यादा तला भुना खाने से बचें तरल पदार्थांें का सेवन जरुर करें फल व मेवे खाएं । कब्ज से खास तौर पर बचें । भूख कदापि न मारें इससे कमजोरी आ जाएगी ओर कमजोर होकर आप कैसे लड़ेंगें परीक्षा से ? परीक्षा के दौरान मैंगनीज , पोटेषियम , मैगनिषियम व बी 1 , बी 12 तथा बी 5 तत्वों से युक्त खाद्य पदार्थ खाएं । इनमें कच्चे फल , सलाद , अखरोट , बादाम व जूस का आधिक्य रखें । पर एक बार में बहुत ज़्यादा कदापि न खाएं इससे नींद व आलस्य बढ़ सकता है । भले ही कई बार खाना पड़े पर बिना खाए न रहें ।

खेल , व्यायाम व योग भी :

कुछ देर अपनी पसंद का खेल खेलें या व्यायाम करें , इससे तन - मन दोनों ही स्वस्थ रहेंगें जब थक जाएं तो ताजी हवा में थोड़ा घूम लें , लंबे - लंबे सांस लें किसी विशेषज्ञ के देखरेख में योग भी कर सकते हैं । पर , इन सबमें कितना समय देना है इसका ख्याल जरुर रखें ।

बिन्दुवार बनाएं नोट्स :

लिखकर, बिंदुवार पढ़ने से विषयवस्तु जल्दी व स्थायी रूप से मस्तिष्क में बैठती है।जरुरी नहीं कि विस्तार से लिखें पॉइंट लिखकर उस पर चिंतन करें पर परीक्षा से पहले ‘सेल्फ टेस्ट’ या मॉक टेस्ट अवश्य लें इससे टाइम मैनेजमेंट में मदद मिलेगी । लिखने की स्पीड़ के साथ स्पष्टता का भी पूरा ख्याल रखें । सुन्दर लेख का मतलब ही है अच्छे अंक या ग्रेड़।

साफ , सुथरी कॉपी अच्छे अंक :

परीक्षा में घबरायें नही, आत्म विष्वास के साथ उत्तर लिखें , लिखने से पहले अच्छी तरह सोच लें , ताकि लिख कर काटना न पड़े , इससे जहां समय बचेगा वहीं उत्तर पुस्तिका भी साफ सुथरी रहेगी जिसका परीक्षक पर अच्छा असर पड़ता हैं। प्रस्तुति करण पर विषेष ध्यान दें ।

बहुत ज़रूरी टाइम मैनेजमैंट :

उत्तर लिखने से पहले प्रष्न को खूब अच्छी तरह से पढ़ ही लेना चाहिये,केवल वही लिखें जो पूछा गया ह्र्रै अनावष्यक लिखने से अच्छे अंक या ग्रेड़ नहीं आते और समय भी व्यर्थ जाता है। समय का नियोजन अंकभार , प्रश्नों की संख्या, के अनुसार करने से जहां सारे प्रश्न हल कर पाते हैं वहीं रीविजन का भी समय मिल जाता हैं । प्रश्नों को उनके अंक भार के अनुसार ही समय दें तथा अंत में त्रुटि सुधार हेतु भी कुछ समय बचाकर रखना बुद्धिमानी होगी।

नकल ? ना बाबा ना ! :

परीक्षा कक्ष में टेंशन न लें ,स्वयं के उत्तरों पर ही विश्वास रखें । नकल करके अच्छे अंक या ग्रेड़ नहीं आते किसी से पूछने के साथ बताने पर भी वक्त ज़ाया करना भारी पड़ सकता है । ।जो भी लिखें पूरा विष्वास हो जाने के बाद ही लिखें ।

कैसा हो प्रस्तुतिकरण :

प्रस्तुतिकरण सबसे महत्वपूर्ण है । अच्छा व सटीक तथा प्रश्नानुसार आकर्षक प्रस्तुतिकरण सोने में सुहागे जैसा काम करता है । काट , छांट , फ्लूड कर उपयोग , आपकी विश्सनीयता पर तो शक पैदा करता ही है आपकी मेहनत पर भी पानी फेर देता है । बेहतर हो कि उत्तर के महत्वपूर्ण भागों को अंडरलाइन कर दें । हां , सारे प्रश्न दी गई शब्द सीमा में हल करेंगें तो अंक अच्छे आएंगें ही ।


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