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वर्ष: 2, अंक 32,  मार्च(प्रथम), 2018



तारीफ


राजीव कुमार


रंगमंच की दुनिया में दोनों दोस्त तेजी से उभर रहे थे। नाटक में उनके अभिनय को देखकर दर्शक गर्मजोशी से तालियां बजाते। कौशल और विशाल दोनों ने एक नाटक की प्रस्तुति दूसरे राज्य में दी। दर्शकों की उम्मीद पर दोनों खरे नहीं उतरे इसीलिए दर्शकों ने गर्मजोशी से तालियां भी नहीं बजाईं।

नाटक प्रेमी एक आदमी स्टेज पर चढ़ा और कौशल से कहा, “आज तक जितनी भी एक्टिंग मैंने देखी हैं तुमने बहुत घटिया एक्टिंग की है।“”

एक और आदमी स्टेज पर चढ़ा और विशाल से बोला, “जाओ बाबू, दूसरा कोई काम करो। एक नाटक-वाटक तुम्हारे वश की बात नहीं है।”

कौशल और विशाल दोनों अपने घर उदास होकर लौटे।

कौशल ने उस दर्शक की खरी-खोटी बात को दिल से लगा लिया और अवसादग्रस्त होकर अपने कैरियर को खत्म कर लिया।

विशाल ने उस दर्शक की बात को, उसके उलाहने को तारीफ मानकर चिंतन-मनन किया और खुद को यही समझाया कि वो तो कल की बात थी। आज तो मैंने कुछ किया ही नहीं। आज से बहुत मेहनत करना है, ज्यादा और ज्यादा। अंततः विशाल स्टेज की दुनिया में सबका प्रेरणास्रोत बन गया।


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