Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 32,  मार्च(प्रथम), 2018



दोहरा मापदंड
(माँ की गाली और नारी सम्मान )


अर्जित पाण्डेय


ये कहानी है एक काल्पनिक युवक की ,जिसकी मैंने कल्पना की है पर यह युवक वास्तविकता से परे नही है ,सूरज की किरणें जब खिलते हुए पुष्प की तरह चारो दिशाओ में फैलती है तब यह युवक उन किरणों से रूबरू होने ,उनके प्राकृतिक सौन्दर्य को महसूस करने की बजाय नींद की आगोश में चादर तानकर सोता रहता है |चलिए इस काल्पनिक युवक को कोई नाम दे देते है हा इसका नाम है अवनीश |

भारत के सबसे अच्छे इंस्टिट्यूट आई आई टी दिल्ली का एक छात्र है | स्वतन्त्र विचारधारा वाला एक युवक जिसे इस बात का गुरुर है की वो सबसे अच्छे इंस्टिट्यूट में पढता है आम लोगो से ज्यादा होशियार है और समझदार भी |

जब लोग तरक्की की सीढियों पर चढ़ने लगते है तो पीछे छूट गयी सीढ़ी की तरफ पलटकर कभी देखते तक नही ,एक वक्त था जब उसी सीढ़ी ने इन्हें सहारा दिया था |हा मै ये बात इसलिए बताना चाह रहा क्युकी जब लोग हायर एजुकेशन की तरफ बढ़ते है तो वो बचपन में बताई गयी बातो को भूल जाते है ,बचपन में हमे सिखाया जाता है गाली देना गलत बात है पर आज इस आधुनिक दौर में ज्यादातर पढ़े लिखे लोगो की जुबान पर गाली होती है अवनीश की तो हर बात गाली से ही शुरू होती है | बचपन में सिखाया जाता है जीवो पर दया करो और आज इस आधुनिक युग में अधिकतर लोग प्रोटीन का हवाला देते हुए किसी रेस्टोरेंट में चिकेन मटन खाते नजर आते है अवनीश हर हफ्ते जाता है रेस्टोरेंट में, किसी जीव के पंखो को नोंचकर उसके तडपते जिस्म से निकले प्रोटीन ,विटामिन और तमाम इन्सान के शरीर के लिए आवश्यक तत्वों को खाना अवनीश को बहुत ही ज्यादा पसंद है |

और मै ,मै तो अवनीश से एकदम अलग हूँ ,जिस प्रकार नदी के किनारे कभी मिलते नही है ,जिस प्रकार धरती और अम्बर का मिलन काल्पनिक है और जिस प्रकार आदमी के खुद के नयन एक दुसरे से कभी मिलते नही अलग अलग रहते है वैसे ही मेरे और अवनीश के विचार है जी कभी मिल नही सकते |एक तरफ जहा मै एक कोने में बैठा अपने विचारो से लड़ता हुआ खुद को बैचैन और एकांत पाता हूँ वही अवनीश लोगो से घिरा रहता है उसकी बाते कमाल की होती है और लोग उसकी बातो से प्रभावित भी होते है |

हुआ यु की एक दिन लड़के लडकियों की मण्डली बैठी हुई थी और अवनीश बोल रहा था यार सच में आज लडकियों की दशा बड़ी ख़राब है जहा देखो छेड़खानी ,रेप लडकियों की कोई इज्जत ही नही है मनोरंजन का सामान समझ लिया गया है लडकियों को और फिर उसके मुह से निकली माँ की गाली |लोगो ने तालिया बजाई सबकी नजर में अवनीश की इज्जत बढ़ गयी क्या लड़का है कितना अच्छा सोचता है और मै,

मै फिर से लड़ रहा था अपने विचारो से की आखिर माँ की गाली देने वाला अवनीश कैसे लडकियों की इज्जत की बात कर सकता है ,आखिर ये कैसा मुखौटा है और कैसे लोग है जो ताली बजाकर वाहवाही तो दे रहे पर कोई ये नही पूछता है की माँ की गाली तो एक दाग है किसी महिला के सम्मान ,प्रतिष्ठा और गौरव पर |

यही तो हो रहा है न आजकल नब्बे प्रतिशत लोग नारी के सम्मान की बात तो करते है पर खुद की जुबान से उसी सम्मान का बलात्कार कर डालते है माँ और बहन की गाली देकर |

मण्डली खतम हुई और अवनीश जाने लगा मैंने देखा अवनीश अकेला है तो मै उसके पास गया और बोला भाई क्या बात है नारी सम्मान की बात तो काफी बढ़िया तरीके से की ,गाली देते हुए अवनीश बोला अबे कैसे न करता सामने पायल बैठी थी ,एकदम माल लग रही थी थोडा तो पोज बनाने का न रे |साली को इम्प्रेस कर दिया देखा न तूने कैसे मुझे ही देख रही थी |अवनीश ने और भी बहुत सारी गन्दी और भद्दी बाते की पायल के बारे में उसके अंगो के बारे में जो मै सावर्जनिक रूप से बता नही सकता पर सोचने वाली बात है न आखिर पायल और पायल जैसे तमाम लडकियों को अवनीश का यह चेहरा दिखता क्यों नही |क्यों जब पायल के सामने और उसकी जैसे बैठी और लडकियों के सामने अवनीश माँ बहन की गाली देकर महिला सम्मान की बात करता है तो उनमे से कोई एक लड़की खड़ी होकर कहती नही है बंद करो अवनीश ये दोहरा मापदंड ,दोहरे चरित्र के तुम बहुत ही घटिया और नीच इन्सान हो |एक तरफ तुम जिस माँ से जन्मे हो उस माँ शब्द को अपनी जुबान से गाली दे रहे हो और दूसरी तरफ उसी जुबान से मह्लिला सम्मान की बाते कर रहे हो , धिक्कार है तुम पर और तुम्हारे इस घिनौने चेहरे |


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें