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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



आओ देख लो न-


शुचि 'भवि'


         
                  
आओ देख लो न-

बन गयी हूँ पत्थर अब,,,

तुम्हारी चाहत जो थी-

पूजी जाऊँ मैं भी कभी....
    

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