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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



फागुन आइल जी!


शंकर मुनि राय ‘गड़बड़’


         


भइया से भउजी कहें .. “फागुन आइल जी!”
राम.रमइया बाबा गावस, नवहा.नवही गीत
दुलहा के दुलहिन समझावे प्रेमभाव की रीत।
खेत.बधारे सरसो.अलसी मन बहलावे जी !
भइया से भउजी कहें .. “फागुन आइल जी!”
गांव-गली में ढोल-नगाराए मन में लाल-गुलाल
धनिया के मन फूल फुलाइल फगुनाहट के ताल। 
चिट्ठी आइल ससुरारी से.”पाहुन आई जी !”
भइया से भउजी कहें .. “फागुन आइल जी!”
अपनी-अपनी डफली भाई अपना-अपना राग 
मौसम बउराइल त लागल गदहों गावे  फ़ाग ।  
“गडबड” ताल मिले ना आपन मन भरमाइल जी 
भइया से भउजी कहें .. “फागुन आइल जी!”

    

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