Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



पुष्पा मेहरा


रंगों की बौछार


         

माँग में सिंदूर भरे 
लाल चूनर ओढ़े 
रंगों का तोहफ़ा हाथ लिए 
नटखट बाला सी भोर 
सप्त अश्वों पर सवार 
आकाश द्वार खोल
सूरज की सीढ़ी से 
नीचे ज्यों उतरी कि 
आमों की अमराई में 
कोयल की कुहुक संग 
बसंती चौपाल में 
हवाओं की झाँझर बाँध 
अलबेली नार होली 
तन–मन भिगोती मिली,  
सबका मन मोहती मिली 
नैराश्य तिमिर में फ़िर 
आशा की किरण दिखी - 
बच्चे बूढ़े और जवान 
गिले-शिकवे भूल कर   
रंग पिचकारी लिए 
हाथ में हाथ डाले 
भंग का सरूर भरे 
गले से सब मिल रहे,
प्रेम रंग रँग रहे |
रंग भरी होली ये -
पकवानों की
सुगंध भरी 
मीठी गुझियों सी 
रस भरी 
छल-छद्म मिटाने आई 
दृढ़ आस्था,प्रेम,विश्वास और 
निच्छल भक्ति का 
पैगाम लाई |
देखो-देखो तो 
सूरज का तेज लिए 
रंगों की बौछार लिए 
हमारे आँगन 
हमारे दिलों के आँगन 
प्रेम-पगी होली आई 
मन में उमंग और  
भावों में तरंग लाई | 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें