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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



हुये बावरिया होली में


नरेंद्र श्रीवास्तव


   

हो गई नीली,पीली,कत्थई,
लाल चुनरिया होली में।
रंग में भीजें और भिजायें
हुये बावरिया होली में।।

संग हवा के उड़ा गुलाल
नीला अंबर हुआ लाल।
आ रंग में ऐसे रंग जायें
मैं रंग डालूं,तू रंग डाल।।

आज नहीं डर जग वालों का,
डूबी नगरिया होली में।
हो गई नीली,पीली,कत्थई,
लाल चुनरिया होली में।।

महक रहा खुशबू से मौसम
मस्ती में झूमें हम और तुम।
गूँजे गीत मिलन के चहूँ दिश
बाहों में झूमें हम और तुम।।

पीकर नेह-भंग तरंग की
भूलें खबरिया होली में।
हो गई नीली,पीली,कत्थई,
लाल चुनरिया होली में।।

  

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