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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



आ गया फाग


मुकेश कुमार ऋषि वर्मा


   

आ गया फाग |
छिड़ गया राग ||

गोरी की बदली चाल |
जब हुए गाल लाल ||

उढ़ गयी चदरिया |
बेरिन बीच बजरिया ||

जो गिर गया गुलाल |
अंग-अंग हुआ बेहाल ||

छेड़ रही बंसती तान |
भंग में फसी जान ||

आ गया फाग |
छिड़ गया राग ||

बच्चे - बूढे़ हुए जवान |
खड़े भर पिचकारी तान ||

हो गये रंग-बिरंगे |
तन-मन सब चंगे ||

होली खेलो मन से |
लालच छोड़ो तन से ||

मर्यादा न छोड़ना |
बैर-भाव सब भूलना ||
 
  

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