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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



प्रेम पत्र


मिताली खोड़ियार


          

बड़ी मुश्किल से मैंने वे प्रेम पत्र जलाये थे  
जो हमारे प्रेम की पहली और अंतिम निशानी थे 
गर्म लपटों के बारीक़ धुएं से होकर 
हमारा प्यार इधर-उधर बिखर गया 
प्यार अमर होता है न, इसलिए ख़त्म न हुआ 
हमारा प्यार स्वर्ग नरक की नियति से दूर  
मोक्ष बन गया 
  

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