Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



मैं से हम


मिताली खोड़ियार


      

मैं बाहर निकलती हूँ धूप को समेटने 
हवा में बालों को लहराने के लिए 
आंखे बंद कर मैं महसूस करती हूँ मेरे अन्दर 
याद करने की कोशिश करती हूँ तुम्हारी खुशबू 
और तुम्हारी बांहों में मेरा विलीन हो जाना 
कुछ देर तक मैं भूल जाती हूँ कि मैं कौन हूँ 
कोई मुझे सम्हाले रखता है देर तक 
मेरे माथे में सिमटा धूप चमकने लगता है तब 
हवा बादलों से आजाद हो हमें छुपा लेती है 
हम नज़र नहीं आते 
हमारा प्रेम तब सांसारिक से अलौकिक हो उठता है 

  

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें