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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



संयम


लवनीत मिश्र


 	

बुद्धि ज्ञान का मूल मंत्र,
संयम और सहायक,
तर्क वितर्क कर पाने के,
हमे बनाये लायक,
बिन विचारे जो करे,
वो फलित ना होवे काम,
शीघ्रता के नाम पर,
दूषित होवे नाम,
संयम सबर धैर्य को,
जिसने लिया अपनाए,
औरो का मै क्या कहू,
आप शीतल हो जाए,
दुख की कठीन परिक्षा,
सुख मे नियमित सोच,
संयम है तो सब भला,
नही तो सब है बोझ ।                                                                                             

     

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