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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



हमारा खून


चन्द्र मोहन किस्कु


 
       
वे जमीन लूट रहे हैं
घर से बेदखल कर रहे हैं
कह रहे हैं  ——-
इसका नाम ही विकास है
वे जंगल और पहाड़ों से
खदेड़ रहे है
बन्जर देशों में
जहाँ खेती का ठिकाना नहीं
जंगल से पेड़ काटने की
आवाज लगातार आ रही है
अरे वो विनाश के ठेकेदार
होशियार ______
पेड़-लत्ताओं से
निकल रहा है
हमारा ताजा खून.
  

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