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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



मेरे साथ ही खत्म हो जायेगा


डॉ० अनिल चड्डा


 	

मेरे अंदर 
क्या चल रहा है
क्यों चल रहा है
किसी से मैं कहता नहीं
कहने से फायदा भी नहीं
जिसने जो सोचना है
वही सोचेगा
जिसने जो करना है
वही करेगा
तो फिर
अपना अन्तस् क्यों 
नंगा करूँ
क्यों 
किसी के उपहास का
पात्र बनूँ
क्यों किसी की 
सहानुभूति के लिए तरसूँ
इसलिए
जो मेरे अंदर है
मेरे साथ ही चला जायेगा
मेरे साथ ही खत्म हो जायेगा


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