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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



हाइकु


सुशील शर्मा


 

कली भ्रमर 
पुष्प बसंत 
सुशील शर्मा 

शस्य श्यामला 
मदमस्त श्रृंगार 
बसंती प्यार 

मस्त भ्रमर 
कलियों के कानों में 
गीत सुनाये। 

पराग रस 
गुनगुनाते भौरें 
फूलों पर झूलें। 

कोकिल कूकी 
सतरंगी बसंत 
नवल कली। 

ऋतु अनंग 
रतिमय आनंद 
मस्त मदन। 

पीली सरसों 
केशरी है पलाश 
पुष्प सुवास। 

भौरीं गुंजन 
बसंत निकुंजन 
पिक कुंजन 

मधुप गान 
कलियन वितान 
नैनन बान। 

रंग अनंत 
चित्रकार बसंत 
सजा दिगंत 

     

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