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साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



हाइकु


अशोक बाबू माहौर


  
  1 

पीपल घना
विशाल हाथ फैले
छाँव निराली ! 

  2 

मंद समीर
लुढ़कती बाहर
कला दिखाती! 

  3 

बिटिया खड़ी
राह सूमसाम है
हिम्मत लाती! 

  4 

ड़र सताता
रात घनी पसरी
चारों तरफ! 

  5 

अपना घर
चिराग क्यों नहीं है
निराश हम!             

 

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