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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



प्रेमगीत


सुशील शर्मा


         
 
तुम मेरे दिल की बाती हो।
जब चाहूं तब जल जाती हो।
प्रेम समंदर इतनी पैठी
हरदम प्रेम में मदमाती हो।

स्नेह स्वर्ण सी सिंचित तुम।
मेरे मन में अनुमोदित तुम।
जन्म जन्म से तुझ से रिश्ता।
मेरी अर्धांगिनी घोषित तुम।

तुमने अब स्वीकार किया
मैं तेरे मन में जला दीया।
अब न छुपाओ खुद को तुम
तेरी आँखों ने इज़हार किया।

पल पल तेरे बिन अब रहना मुश्किल है।
बिन तेरे जीवन ये जीना मुश्किल है।
आज से तुम मेरी वेलेंटाइन बन जाओ।
अब तन से तन की दूरी सहना मुश्किल है।

तुम बिन जीवन लगे अधूरा सा।
घर तुम बिन लगता घूरा सा।
तन मन धन समर्पित तुमको है।
मिल कर कर दो मुझको पूरा सा।

तेरे संग हरपल अब वेलेंटाइन है।
तेरे संग जीवन मीठा गायन है।
हर पल जीवन का अब तेरा है।
तू मेरे दिल की ठाकुरायन है।

     

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