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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



कुछ खुशी,कुछ गम


नरेंद्र श्रीवास्तव


 
कुछ खुशी,कुछ गम पी लेता है।
हिस्से की जिंदगी जी लेता है।।

सब्र करना आने लगा है उसको।
हँसी की बात पे,हँस भी लेता है।।

आसमाँ,चाँद,तारे सोने नहीं देते।
खोल के अलबम देख ही लेता है।।

अदना कमीज से आया हुनर ये।
धो भी लेता है,सीं भी लेता है।।

भाषण नेताओं के सुनके चाव से।
भोज में डट के खा-पी लेता है।।

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