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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



न्याय की अवमानना पर गौर हो


डा. दिनेश त्रिपाठी `शम्स’


      
न्याय की अवमानना पर गौर हो ,
अब हमारी प्रार्थना पर गौर हो |

खिड़कियाँ अब सोच की मत बंद हों ,
हर नई संभावना पर गौर हो |

आज तक 'जन ' को उपेक्षित ही किया ,
तंत्र की दुर्भावना पर गौर हो |

दीनता बागी न हो जाए कहीं ,
वक़्त है हर याचना पर गौर हो |

गीत जीवन के निरंतर गा रहा ,
'शम्स' की इस साधना पर गौर हो |
  

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