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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



मखमली अहसास बस जीवित रहे


डा. दिनेश त्रिपाठी `शम्स’


      
मखमली अहसास बस जीवित  रहे ,
प्यार का विश्वास बस  जीवित रहे |

चाँद-तारे सब मिलेंगे आपको ,
शर्त है आकाश  बस  जीवित रहे |

जीतना या हारना मुद्दा नहीं ,
खेल का अभ्यास बस  जीवित रहे |

मारे जायेंगे असुर सारे मगर ,
राम का वनवास बस  जीवित रहे |

यक्ष प्रश्नों तक पहुँचने के लिए ,
है ज़रुरी प्यास बस  जीवित रहे |

खुद-ब-खुद पतझर सुखद हो जाएगा ,
दृष्टि में मधुमास बस  जीवित रहे |

'शम्स' को मरने का डर बिलकुल नहीं ,
अन्त तक उल्लास बस  जीवित रहे |
  

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