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वर्ष: 2, अंक 32, मार्च(प्रथम), 2018



घड़ी


डॉ. प्रमोद सोनवानी पुष्प


 
    
टिक-टिक,टिक-टिक गाती है ।
समय हमें बतलाती है ।।
हमको आगे बढ़ना है ।
ज्ञान यही सिखलाती है ।।

समय नहीं अब खोना है ।
मंजिल को बस पाना है ।।
बात पते की बतलाती है ।
वह तो घड़ी कहलाती है ।।

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