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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

वक्त के साथ जो चल नहीं पाते

अजय प्रसाद

वक्त के साथ जो चल नहीं पाते हैसियत अपनी बदल नहीं पाते । जो फिसल गये यारों जवानी में उम्र भर फिर वो संभल नहीं पाते । लाख करें हम कोशिश बचने की मौत के डर से, निकल नहीं पाते । सड़ जातें हैं तालाब की मानिंद हद से कभी जो निकल नहीं पाते । हासिल उन्हें होती है कामयाबी इरादे जिनके कभी टल नहीं पाते

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