मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

हम जब....

सुरेंद्र सैनी बवानीवाल

हम जब इस दुनिया में आते हैं तो आज़ाद ख्याल लेकर आते हैं लेकिन जैसे -जैसे वक़्त बीतता है हमारे विचार बदलने लगते हैं जैसे कोई सर्प बदलता है अपनी केंचुली जैसे कोई तरु बदल लेता है अपने पत्ते. हम समझौता करने लगते हैं अपने हालात से परिस्थिति के अनुसार या किसी मज़बूरी में और फिर तमाम उम्र निकलती है उन्हीं बेबस ख्यालों के साथ चिंगारी से दबे विचारों के साथ जिसे कहते हैं दुनियादारी "उड़ता ", बनावटी से व्यवहारो के साथ.


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें