मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

लीक से हटकर

शबनम शर्मा

आओ लीक से हटकर कुछ किया जाए, नापाक इरादों से न अब जिया जाए, जो चमका दे किस्मत मेरे वतन की उन इरादों को अब बुलन्द किया जाए दुश्मनों के हौसले पस्त हों यारों, खंजर कुछ इस तरह तेज़ किया जाए हवा मुल्क में गरम बहे न कहीं नापाक इरादों को यूँ खत्म किया जाए बच्चा-बच्चा खंजर बना घूमे दिल उनका यूँ मजबूत किया जाए खून खौले बरफ की पहाड़ियों का भी मौसम का रुख कुछ यूँ बदल दिया जाए।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें