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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

प्रार्थना

रामदयाल रोहज

पतझङ ने यौवन लिया छीन हो गए तरु सब दीन हीन नंगे तन आँखें झुकी हुई शरमाते साँसें रुकी हुई मृत देह में फिर से भर दो नवजीवन का गान मुर्झाए तिनकों को दे दो हर खुशियों का दान हर बगिया फिर से महक उठे मस्ती में चिङिया चहक उठे चेहरों पर फिर से रंग खिले उल्लास से डालें गले मिले डाल डाल को लौटा दो उनके अपने अलंकार खोया यौवन पुन:थमाकर कर दो ये उपकार बहुरंगे फूल फले फूले कोकिल तरुडालों पर झूले जंगल में मंगल गान करे तितली मकरंद का पान करे षट्पद मदिरा को पीकर बेसुध करे गुंजार हँसती खिलती हवा बजाए मधुर मधुर सितार


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