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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

ईश्वर की आवाज

राजीव डोगरा 'विमल'

जो आया मेरे दर पर बस कुछ न कुछ मांगने आया। पर कभी मांगा न मुझे न मांगा मेरा प्रेम तत्व मुझसे। बस हताश रहा मुक्ति के लिए, और परेशान रहा अपनी इच्छाओं के लिए। बस ढूंढता रहा लोगों में कमियां न तलाशा की उनकी आत्मा में मेरी अभिव्यक्ति। अपनी घर की चारदीवारी की तरह मुझे भी बांटता रहा, कभी मंदिर,कभी मस्जिद कभी गिरजाघर के रूप में।


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