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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020

ऐ मौत है तू बदनाम व्यर्थ

डा० नितिषा श्रीवास्तव “कनकपुष्प”

1. ऐ मौत है तू बदनाम व्यर्थ, दर्द तो जीवन देता है। तू देती मुक्ति हर बंधन से, जीवन तो बंधन देता है॥ 2. ऐ मौत है तू बदनाम व्यर्थ, दर्द तो जीवन देता है। तू ले जाती है ग़म सारे, जीवन तो ग़म ही देता है॥ 3. ऐ मौत है तू बदनाम व्यर्थ, दर्द तो जीवन देता है। तू पहचान कराती अपनों की, जीवन तो भ्रम ही देता है॥ 4. ऐ मौत है तू बदनाम व्यर्थ, दर्द तो जीवन देता है। है अंत सभी तृष्णा की तू, जीवन तो तृष्णा देती है॥ 5. ऐ मौत है तू बदनाम व्यर्थ, दर्द तो जीवन देता है। तू ही इस जग में मात्र अटल, जीवन में सब टल सकता है॥

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